सोमवार, 1 मई 2017

मजदूर पर लिखी कविता

मजदूर दिवस के मौके पर मेरे लेखन के प्रारम्भिक काल मे मजदूर की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करते हुए लिखी मेरी ये रचना:-


मै
मज़दूर हूँ।
दर्द से कराहते
निज दिल की व्यथाओं से
चूर हूँ।
मैं
मजदूर हूँ।

रोता हूँ, चिल्लाता हूँ।
गम के गीत
गाता हूँ।
मन है मेरा सहमा सा,
क्योकि मैं
बेकसूर हूँ।
मैं
मजदूर हूँ।

सुबह थकाती,शाम थकाती,
दुनिया हम पर रौब दिखाती।
इस दुनिया की सब रस्मों से,
मै तो कोशों दूर हूँ।
मैं
मजदूर हूँ।

कोई चढ़ता घोड़ा-गाड़ी,
स्कूटर कोई करे सवारी।
कोई करता हवा-हवाई,
लेकिन मै मजबूर हूँ।
मैं मजदूर हूँ।

मेरा एक दुपहिया वाहन,
जेठ,कुवार हो या फिर सावन।
हर मौसम मे वही है अपना,
हर सुविधा से दूर हूँ।
मैं
मजदूर हूँ।

कवि शिव इलाहाबादी यश
कवि एवं लेखक        
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ब्लॉग-www.kavishivallahabadi.blogspot.com




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