शुक्रवार, 12 मई 2017

मुझे अपना बनाने की -कवि शिव इलाहाबादी (mujhe apna banane ki-kavi shiv allahabadi )

मेरी एक नवीन रचना से कुछ पंक्तियाँ:-

मुझे अपना बनाने की ,
कसम खा के तो देखा कर !

कि जब भी हो अकेला तू ,
जरा मुसका के देखा कर !

जमाने की सभी उलझन,
तू यूँ ही भूल जायेगा !

जो दुनिया रूठ जाये तो ,
मुझे अपना के देखा कर !

कवि शिव इलाहाबादी 'यश'
कवि एवं लेखक
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