मंगलवार, 23 मई 2017

सत्ता के दुरुपयोग पर व्यंग:कवि शिव इलाहाबादी(satta ke durupyog aur kalamkaaro ki khamoshi par vyang: Kavi shiv allahabadi )

सत्ता की अनावश्यक हिटलरशाही और तथाकथित कलमकारों की चुप्पी पर व्यंग करती मेरी ये रचना :-

कलम सुहागन बनी हुई है ,
सत्ता के गलियारों की !

चाँदी ही चाँदी दिखती है ,
नेताओं के यारों की !

एक तरफ सैनिक बेचारे,
मारे जाते सीमा पर !

सन्सद बस्ती बनी हुई है ,
कुर्सी के बीमारों की !


कवि शिव इलाहाबादी 'यश'
कवि एवं लेखक
mob-7398328084
All Rights Reserved@kavishivallahabadi
ब्लाग-www.kavishivallahabadi@blogspot.com

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें