शनिवार, 27 मई 2017

मेरा दर्द फसाना बनकर:-कवि शिव इलाहाबादी(kavi shiv allahabadi:mera dard fasana bankar )

मेरी एक नवीन रचना से कुछ पंक्तियाँ:-

मेरा दर्द फसाना बनकर,
प्रेम कहानी लिख देगा!

लिखा न होगा अब तक जो भी,
ऐसी वाणी लिख देगा !

भटक रहे थे दर-2 कल जो,
आज बने हैं वो राजे !

लेकिन मै हूँ अब भी राही,
राह निशानी लिख देगा !

कवि शिव इलाहाबादी 'यश'
कवि एवं लेखक
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ब्लाग-www.kavishivallahabadi@blogspot.com

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