बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

माँ पर कुछ बेहतरीन शेर-कवि शिव इलाहाबादी



अपनी माँ की स्मृति मे लिखी मेरी ये पंक्तियाँ:-

इस जहाँ मे उस रिश्ते की कोई किताब नहीं देखी।
माँ जैसी कोई हमसफर और माहताब नहीं देखी।।
जलाकर खुद को जो रोशन करती हो हमारी राहें,
इस दुनिया मे ऐसी कोई आफताब नहीं देखी।
 
कवि शिव इलाहाबादी यश
कवि एवं लेखक
Mob-7398328084