शनिवार, 8 जुलाई 2017

एक बेबाक और बिजली के समान शोहदों पर बरसने वाली महिला का समर्थन करती मेरी पंक्तियाँ :-

बहादुर और शोहदों पर बिजली की तरह बरसने वाली महिलाओं पर  कुछ पंक्तियाँ:-

तेरे साहस से शायद अब तक अंजान रहा होगा !
बाते है बेबाक तेरी वो न पहचान रहा होगा !

बोल गया वो सोच के अबला जो कुछ भी मन मे आया!
लेकिन आ टपकेगी ज्वाला ये न भान रहा होगा !

कवि शिव इलाहाबादी 'यश'
कवि एवं लेखक
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