गुरुवार, 6 जुलाई 2017

किसी के घूरने और प्यार मे अंतर कर पाने पर लिखी ये पंक्तियाँ-कवि शिव इलाहाबादी

किसी के घूरने और प्यार मे अंतर कर पाने पर लिखी ये पंक्तियाँ:-

भला हो नजरों का तेरी
जो झुककर सच बता पायी !

नही तुम यूँ किसी के घूरने को,
प्यार कह देती !

कवि शिव इलाहाबादी 'यश'
कवि एवं लेखक
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