शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

एक शेर :- मै उमीदों के शहर में

एक शेर :-

मै उमीदों  के शहर में अब भी हूँ ठहरा  नहीं  ,
आज भी तू ही मेरी मंजिल भी है और राह भी !

कवि शिव इलाहाबादी
कवि एवं लेखक
मोब.7398328084
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