शनिवार, 16 दिसंबर 2017

कवि शिव इलाहाबादी : एक व्यंग्य ek vyangya : kavi shiv allahabadi

एक व्यंग्य :-

चंद सिक्कों की जदों  में बह गए वो सूरमा,
जो कभी इंसानियत की बात कर थकते न थे !

कवि शिव इलाहाबादी ’यश’
कवि एवं लेखक
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ब्लॉग- www.kavishivallahabadi.blogspot.com
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